Aparimey Sankhya Ki Paribhasha, अपरिमेय संख्या की परिभाषा

आज हम जानेगे की Aparimey Sankhya Ki Paribhasha, अपरिमेय संख्या की परिभाषा क्या है, अपरिमेय संख्याओ के उदाहरण के बारे में आपको नीचे बताने वाले है.

अब हम जानेंगे की अपरिमेय संख्या किसे कहते है, अपरिमेय संख्या क्या होती है, अपरिमेय संख्या की विशेषताएं, अपरिमेय और परिमेय में अंतर के बारे में आपको बता रहे है.

Aparimey Sankhya Ki Paribhasha-

ऐसी वास्तविक संख्याएँ जिन संख्याओं को हम अंश/हर (p/q) के रूप में व्यक्त नहीं कर सकते उन्हें अपरिमेय संख्याएं कहते हैं।
अपरिमेय संख्याओं का ठीक ठीक मान ज्ञात नहीं किया जा सकता है,
जैसे -√2 , √3 , √7 , π आदि अपरिमेय संख्या हैं।

किसी अपरिमेय संख्या को p/q के रूप में इसलिए नहीं लिखा जा सकता क्योंकि यदि उसे p/q के रूप में लिखा गया तो वह अपरिमेय रहेगी ही नहीं, परिमेय हो जाएगी।
π अपरिमेय संख्या है क्युकी इसका अंत नहीं आता है इसीलिए π का सही मान अभी तक पता नहीं चला है.

अपरिमेय संख्या एक ऐसी संख्या है जिसे पूर्णतः नहीं व्यक्त किया जा सकता है।
अपरिमेय संख्याएं राशियों के रूप में दर्शाई जाती हैं जो अनंत लंबाई तक बढ सकती हैं

Aparimey Sankhya Ki Paribhasha
अपरिमेय संख्या की परिभाषा

अपरिमेय संख्या के जनक कौन है-

अपरिमेय संख्या को सबसे पहले लगभग 400 यु. सु. में ग्रीस के प्रसिद्ध गणित शास्त्री पाईथोगोरस के द्वारा इन संख्याओं का पता लगाया गया.

अपरिमेय संख्या की विशेषताएं-

  • ये केवल वास्तविक संख्याएँ हैं।
  • दो अपरिमेय संख्याओं का योग हमेशा अपरिमेय नहीं होता है।
  • किन्हीं दो अपरिमेय संख्याओं के लिए, उनका लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) मौजूद हो भी सकता है और नहीं भी।
  • अपरिमेय संख्याएँ अनवसानी और अनावर्ती दशमलवों से बनी होती हैं।
  • उदाहरण: √2+√2 = 2√2, जो एक अपरिमेय संख्या है
    2+2√5+(-2√5) = 2, जो एक परिमेय संख्या है
  • दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा अपरिमेय नहीं होता।
  • उदाहरण: √2 x √3 = √6, जो एक अपरिमेय संख्या है
  • √2 x √2 = √4 = 2, जो एक परिमेय संख्या है.
अपरिमेय संख्याओ के उदाहरण

अपरिमेय संख्याओ के उदाहरण-

π- पाई – सबसे अपवादित अपरिमेय संख्या है जो अपने कभी न खत्म होने वाले दशमलव स्थानों के लिए जानी जाती है।
यह लगभग 22/7 है, लेकिन पाई के लिए सटीक संख्या कभी भी एक परिमेय संख्या नहीं हो सकती।

यूलर की संख्या एक प्रसिद्ध अपरिमेय संख्या है जो 2.71828182845 से शुरू होती है… और इसी तरह कभी न खत्म होने वाले दशमलव स्थानों के लिए जानी जाती है इसका इस्तेमाल अक्सर लॉगथ्रिम्स की जटिल गणित अवधारणा में किया जाता है।

गोल्डन रेशियो φ – एक परिचित अपरिमेय संख्या जो लगभग 1.618 के बराबर होता है (सिवाय इसके कि यह लगातार बढ़ता रहता है)।
इसे गोल्डन मीन, डिवाइन प्रोपोर्शन और गोल्डन सेक्शन के नाम से भी जाना जाता है।

वर्गमूल और घनमूल- ये दोनों भी अपरिमेय संख्या होते हैं।
जब तक कोई संख्या पूर्ण वर्ग या घन न हो, वह अपरिमेय होती है।
6 का वर्गमूल निकालने पर इसे अंश के रूप में नहीं लिखा जा सकता, इसलिए यह एक अपरिमेय संख्या है।
जबकि 4 एक पूर्ण वर्ग है जहाँ √4 = 2 है, अर्थात यह एक परिमेय संख्या है।

अपरिमेय संख्याओं की दुनिया में π सबसे ज्यादा अपवादित अपरिमेय संख्या है।
और अन्य संभी √2, √3, √7, यूलर संख्या (e), गोल्डन अनुपात ( Φ ) आदि अपरिमेय संख्याओं की विशेष उदाहरण है।

अपरिमेय और परिमेय में अंतर क्या होता है-

परिमेयअपरिमेय
इन्हें p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।इसे p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
दशमलव विस्तार अन्तिम/असन्तिम या आवर्ती प्रकृति का हो सकता है।दशमलव प्रसार अनवसानी एवं अनावर्ती होता है।
उदाहरण- 0.3333, 1.25उदाहरण- पाई, इ और 3 का वर्गमूल।
उदाहरण- √2 x √2 = √4 = 2उदाहरण- √2 x √3 = √6

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निकर्ष-

जैसा की आज हमने आपको Aparimey Sankhya Ki Paribhasha, अपरिमेय संख्या की परिभाषा की पीडीऍफ़ जानकारी के बारे में आपको बताया है.

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