Vachya Ki Paribhasha Pdf, वाच्य की परिभाषा

आज हम जानेगे की Vachya Ki Paribhasha In Hindi, वाच्य की परिभाषा | वाच्य के प्रकार | वाच्य का अर्थ | वाच्य किसे कहते है | वाच्य क्या है | आपको बताने वाले है.

Vachya Ki Paribhasha-

जिस वाक्य में क्रिया द्वारा बताए गए विषय में कर्ता, कर्म, अथवा भाव में से कौन प्रमुख है उसे वाच्य कहते हैं।
अर्ताथ-जिस वाक्य में लिंग, वचन और पुरुष के कारण क्रिया के रूप में जो परिवर्तन होता है उसे वाच्य कहते है.

  • वाच्य शब्द का अर्थ होता है- बोलने का विषय।
  • वाच्य को अंग्रेज़ी में “voice” कहते हैं।
  • वाच्य में क्रिया को मूल रूप से चलाने वाला कर्ता है, कर्म है या भाव है।
  • जैसे –
  • राधा पत्र लिखती है।
  • मॉं के द्वारा खाना बनाया गया।
  • तुमसे लिखा नहीं जाता
  • मॉं ने खाना बनाया।
  • पत्र राधा द्वारा लिखा जाता है।
Vachya Ki Paribhasha

वाच्य के प्रकार-

वाच्य के तीन प्रकार होते हैं-

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य
  3. भाववाच्य

1. कर्तृवाच्य-

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष, कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों, तो कर्तृवाच्य कहलाया जाता है।

उदाहरण

  • लखन पत्र लिखता है।
  • इस वाक्य में ‘लखन’ कर्ता है एवं ‘पत्र’ कर्म तथा ‘लिखना’ क्रिया है। यहाँ कर्ता ‘लखन’ की प्रधानता है।
  • राकेश पुस्तक पढ़ता है|
  • इस वाक्य में ‘राकेश ’ कर्ता है एवं ‘पुस्तक’ कर्म है एवं ‘पढ़ना’ क्रिया है। यहाँ कर्ता ‘राकेश’ की प्रधानता है।

विशेष –

  • इस वाक्य में कर्तृवाच्य में कर्ता कारक होता है।
  • कर्तृवाच्य में सकर्मक और अकर्मक दोनों क्रियाएँ होती है।

कर्मवाच्य-

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष, कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हो, तो कर्मवाच्य कहलाता है, वहाँ कर्म वाच्य होता है।
कर्म वाच्य में क्रिया सकर्मक होती है।

उदाहरण-

  • श्याम द्वारा क्रिकेट खेला जाता है।
  • वाक्य में ‘द्वारा’ का प्रयोग होने से “श्याम” की प्रधानता समाप्त हो गई एवं खेलना यहाँ प्रधान है और इस क्रिया का सीधा संबंध कर्म से है।
  • रमेश द्वारा पौधे लगाए गए है।
  • वाक्य में ‘द्वारा’ का प्रयोग होने से “रमेश” की प्रधानता समाप्त हो गई एवं ‘पौधे’ कर्म है तथा ‘लगाना’ क्रिया है।
  • यहाँ क्रिया का सीधा संबंध कर्म से है।
  • किसान के द्वारा फसल उगाई जाती है।
  • वाक्य में ‘द्वारा’ का प्रयोग होने से “किसान” की प्रधानता समाप्त हो गई एवं फसल उगाई यहाँ प्रधान है।
  • यहाँ क्रिया का सीधा संबंध कर्म से है।

कर्म वाच्य के प्रयोग से बने उदाहरण-

  • जिस वाक्य में कर्ता ज्ञात ना हो।
  • जैसे- खाना भेजा गया।
  • सूचना में, जहाँ कर्ता निश्चित नहीं हो-
  • जैसे– चोरों का पता लगाया जा रहा है।
  • जिस वाक्य में कर्त्ता प्रकट न हो।
  • जैसे- गुनेहगार को कल पेश किए जाए।
  • जब बिना चाहे कोई क्रिया अचानक हो जाए।
  • जैसे- घर में आग लग गई।

विशेष-

कर्मवाच्य में कर्त्ता की प्रधानता को समाप्त करने के लिए ‘के द्वारा’ एवं ‘द्वारा’ का प्रयोग किया जाता है।
कर्मवाच्य केवल ‘सकर्मक’ क्रिया से बनता है क्योंकि यह कर्म प्रधान है।

3. भाववाच्य-

जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता अथवा कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्य पुरुष हो, तो भाववाच्य कहलाता है इसमें केवल भाव को प्रधानता दी जाती है।

उदाहरण-

  • मुझसे जाया नहीं जाता।
  • इस वाक्य में अकर्मक क्रिया है एवं ‘जाया नहीं जाता’ भाव की प्रधानता है।
  • सुरेश से पढ़ा नहीं जाता।
  • इस वाक्य में अकर्मक क्रिया का प्रयोग है एवं ‘पढ़ा नहीं जाता’ भाव की प्रधानता है।
  • लक्ष्य से दौड़ा नहीं जाता।
  • वाक्य में अकर्मक क्रिया का प्रयोग है एवं ‘दौड़ा नहीं जाता’ भाव की प्रधानता है।

भाववाच्य के प्रयोग से बने उदाहरण-

  • असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए ‘नहीं’ के साथ किया जाता है
  • जैसे – अब तो कुछ याद भी नहीं रखा जाता।
  • जहाँ ‘नहीं’ का प्रयोग नहीं होता वहाँ मूल कर्ता सामान्य होता है.
  • जैसे– चलो बाहर चला जाए।

विशेष-

  • भाववाच्य में क्रिया हमेशा पुल्लिंग, एकवचन तथा अकर्मक होती है।
  • ज़्यादातर भाववाच्यों में नकारात्मक वाक्यों का प्रयोग किया जाता है।
वाच्य की परिभाषा

वाच्य की परिभाषा pdf –

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निकर्ष-

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