Muktak Chhand : मुक्तक छंद की परिभाषा और उदाहरण

इस पोस्ट में हम मुक्तक छंद किसे कहते हैं, Muktak Chhand की परिभाषा, नियम, भेद और मुक्तक छंद के उदाहरण के बारे में डिटेल में समझाने वाले है तो पोस्ट को अंत तक ज़रूर पढ़े|

मुक्तक छंद की परिभाषा :-

“मुक्तक” शब्द संस्कृत के “मुक्त” से बना है, जिसका अर्थ है — स्वतंत्र, अपने आप में पूर्ण।

मुक्तक छंद काव्य वह रचना है इसका हर छंद अपने आप में पूर्ण होता है उसे समझने के लिए पहले या बाद के छंद की ज़रूरत नहीं पड़ती जिसमें कोई एक जुड़ी हुई कहानी नहीं होती।

अग्निपुराण में मुक्तक छंद की परिभाषा है कि जो एक ही श्लोक अपने आप में चमत्कार उत्पन्न करने में सक्षम हो, वह मुक्तक छंद कहलाता है।

तेरहवीं सदी के आचार्य महापात्र विश्वनाथ ने स्पष्ट किया कि जब कोई पद्य दूसरे पद्यों से मुक्त होकर स्वतंत्र अर्थ देता है तो वह मुक्तक छंद है।

मुक्तक छंद और मुक्त छंद में अंतर :-

मुक्त छंद :- एक रचना-शैली है जिसमें मात्रा या वर्णों की कोई निश्चित गिनती नहीं होती। यह आधुनिक हिंदी कविता की देन है जैसे निराला की कविताएं, जिनमें पंक्तियां असमान लंबाई की होती हैं और कोई तयशुदा लय-बंधन नहीं होता।

मुक्तक छंद :- इसका संबंध छंद के रूप (matra/varna की गिनती) से नहीं, बल्कि रचना की संरचना से है यानी छंद आपस में कथा-सूत्र से जुड़े हैं या हर छंद स्वतंत्र है। मुक्तक रचनाएं अक्सर बंधे हुए छंदों — जैसे दोहा, सोरठा या कुण्डलिया — में ही लिखी जाती हैं।

तो याद रखने वाली बात बस इतनी है — मुक्त छंद रूप की आज़ादी है, और मुक्तक विषय-वस्तु की स्वतंत्रता है।

मुक्तक छंद की विशेषताएं :-

  • इसमें कोई निरंतर कथा नहीं होती।
  • यह छंद अपने आप में पूर्ण अर्थ देता है चाहे उसे अलग से पढ़ा जाए।
  • छंदों का क्रम बदल देने पर भी भाव स्पष्ट रहता है, क्योंकि वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं हैं।
  • यह किसी एक भाव, अनुभूति या विचार जैसे श्रृंगार, वैराग्य, भक्ति, व्यंग्य को थोड़े शब्दों में गहराई से व्यक्त करता है।
  • इसका प्रभाव तुरंत और तीव्र होता है, इसीलिए मुक्तक अक्सर याद रह जाते हैं और उद्धरण की तरह इस्तेमाल होते हैं।
Muktak Chhand

मुक्तक छंद के उदाहरण :-Muktak chhand Ke 10 Udaharan

उदाहरण– 1

वह आता दो टूक कलेजे के करता पछताता
पथ पर आता।
पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक ,
चल रहा लकुटिया टेक ,
मुट्ठी भर दाने को भूख मिटाने को
मुँह फटी पुरानी झोली का फैलता
दो टूक कलेजे के कर्ता पछताता पथ पर आता।

उदाहरण–2

करूँ कर जोरकर वंदन ‘जहाँ’ का प्यार मिलता है
मुझे गुरुवर की वाणी में उपनिषद सार मिलता है
गुरु के ज्ञान के बखान की शक्ति है नहीं मुझमें
गुरु की चरण रज में तो सकल संसार मिलता है.

उदाहरण–3

मीरा की प्रभु प्रीत पर, दुनिया को है नाज।
महल छोड़ बन साधवी,पहनी सेवा ताज।
नाम जपे जग आज तक,अमर रहे यह भक्त_
मीरा जैसी भक्त बन,जीवन का रख लाज।

उदाहरण–4

मीरा मीरा सब जपे, मीरा को कर याद।
प्रीत भगवान से लगा, कर ले कुछ फरियाद।
प्रेम भाव के फूल बन, जीवन सौरभ कांत
उलफत करुणा बांटते,सुन्दर कर संवाद।

उदाहरण–5

चितकबरे चाँद को छेड़ो मत
शकुंतला-लालित-मृगछौना-सा अलबेला है।
प्रणय के प्रथम चुंबन-सा
लुके-छिपे फेंके इशारे-सा कितना भोला है।
टाँग रहा किरणों के झालर शयनकक्ष में चौबारा
ओ मत्सरी, विद्वेषी ! द्वेषानल में जलना अशोभन है।
दक्षिण हस्त से यदि रहोगे कार्यरत
तो पहनायेगा चाँद कभी न कभी जयमाला।

उदाहरण–6

गुरु करुणा का सागर है गुरु ममता का सागर है
मिले जिसमें अमर पीयूष गुरु ऐसी ओ गागर है
हमारी छुद्र सी काया को हिमगिरि में तब्दीला
ढके तम ज्ञान की आभा गुरु ऐसी ओ चादर है.

उदाहरण–7

गुरु ही सत गुरु ही चित गुरु ब्रम्हाण्ड का दर्पण
गुरु बिन ज्ञान का कोइ नहीं है केन्द्र आकर्षण
वेदों और पुराणों में यहीं व्याख्यान मिलता है
जले ब्रम्हाण्ड का दीपक स्वयं गुरु को करो अर्पण

उदाहरण–8

  • रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
  • टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ परि जाय।।

उदाहरण–9

  • बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
  • पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।।

यह भी पढ़े :-

 सोरठा छंददोहा छंद
 रोला छंद सवैया छंद

निष्कर्ष :-

मुक्तक का मतलब है एक ऐसी रचना जिसका हर छंद अपने आप में स्वतंत्र और पूर्ण हो, किसी कथा-सूत्र का मोहताज न हो। इसे मुक्त छंद के साथ कोई मिलान नही है जबकि दोनों की परिभाषा, स्वरूप और उदाहरण पूरी तरह अलग हैं।

यदि ये पोस्ट को आपको समझ में आई हो और मुक्तक छंद के बारे में जान चुके होतो फिर आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे और हमारे ब्लॉग परीभाषा देखो को बुकमार्क कर लेवे.

Muktak Chhand FAQ :-

Q:- 1 मुक्तक छंद किसे कहते हैं?

Ans :- मुक्तक वह काव्य रचना है जिसका हर छंद अपने आप में स्वतंत्र और पूर्ण अर्थ देता है, और जिसमें कोई निरंतर कथा नहीं होती।

Q:- 2 मुक्तक छंद और मुक्त छंद में क्या अंतर है?

मुक्त छंद मात्रा-वर्ण के बंधन से मुक्त एक काव्य-रूप है, जबकि मुक्तक विषय-वस्तु की स्वतंत्रता से जुड़ा है इसके छंद अक्सर दोहा जैसे बंधे हुए रूप में ही लिखे जाते हैं।

Q:- 3 क्या मुक्तक में मात्रा या वर्ण के नियम होते हैं?

हां, मुक्तक खुद कोई अलग मात्रा-प्रणाली नहीं है यह अक्सर दोहा, सोरठा जैसे पहले से तय छंदों में लिखा जाता है।

Leave a Comment