Chaupai Chhand : चौपाई छंद के 15 उदाहरण व्याख्या सहित

इस पोस्ट में हम आपको चौपाई छंद किसे कहते है, चौपाईं छंद के उदाहरण, Chaupai Chhand Ki Paribhasha, Chaupai Chhand Ka 10 Udaharan sahit आपको नीचे डिटेल में समझाने वाले है.

चौपाई छंद किसे कहते है:-

चौपाई छंद एक सम मात्रिक छंद है इस छंद के चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएं होती हैं प्रत्येक चरण के अंत में कभी भी गुरु और लघु नहीं आता है या तो दोनों गुरु होंगे या फिर दोनों लघु मात्राएं ही आएंगे यदि इसी प्रकार से उदाहरण मिले तो उसे चौपाई छंद कहते है.

Chaupai Chhand

चौपाई छंद के उदाहरण-

उदाहरण- 1

  • रघुकुल रीत सदा चली आई
    | | | | S | | S | | S S = 16 मात्राएँ
  • प्राण जाए पर वचन न जाई
    S | S | | | | | | | S S = 16 मात्राएँ

व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में हर पंक्ति में 16-16 मात्राएं हैं और हर पंक्ति के अंत में या तो दोनों मात्राएं गुरु हैं या दोनों मात्राएं लघु हैं यानी की पंक्ति के अंत में कभी भी लघु और गुरु नहीं आता.

उदाहरण- 2

  • इहि विधि राम सबहिं समुझावा i i i i s i i i i i i s s = 16 मात्राएँ
  • गुरु पद पदुम हरषि सिर नावा i i i i i i i i i i i i S S = 16 मात्राएँ

उदाहरण- 3

कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि
S | | S | | S | | | | | | = 16 मात्राएँ

कहत लषन सन राम ह्रदय गुनी
| | | | | | | | S | | | | | | = 16 मात्राएँ

व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में हर पंक्ति में 16-16 मात्राएं हैं और हर पंक्ति के अंत में या तो दोनों मात्राएं गुरु हैं या दोनों मात्राएं लघु हैं यानी की पंक्ति के अंत में कभी भी लघु और गुरु नहीं आता.

उदाहरण – 4
बिनु पग चले सुने बिनु काना। I I I I I I S I S I I S S = 16 मात्राएं
कर बिनु कर्म करे विधि नाना ।।
तनु बिनु परस नयन बिनु देखा।
गहे घ्राण बिनु वास असेखा ॥

व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में हर पंक्ति में 16-16 मात्राएं हैं और हर पंक्ति के अंत में या तो दोनों मात्राएं गुरु हैं या दोनों मात्राएं लघु हैं यानी की पंक्ति के अंत में कभी भी लघु और गुरु नहीं आता.

उदाहरण – 5
जो न होत जग जनम भरत को। S i s I I I I I I I I I S = 16 मात्राएं
सकल धरम धुर धरनि धरत को ॥ जो न होत जग जनम भरत को।

उदाहरण – 6

एहि बिधि राम सबहि समुझावा।
। । । । ऽ। । । । । । ऽ ऽ = 16 मात्राएं
गुरु पद पदुम हरषि सिरु नावा॥
गनपति गौरि गिरीसु मनाई।
चले असीस पाइ रघुराई॥

व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में हर पंक्ति में 16-16 मात्राएं हैं और हर पंक्ति के अंत में या तो दोनों मात्राएं गुरु हैं या दोनों मात्राएं लघु हैं यानी की पंक्ति के अंत में कभी भी लघु और गुरु नहीं आता.

उदाहरण – 7

नित नूतन मंगल पुर माहीं।
निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।
बड़े भोर भूपतिमनि जागे।
जाचक गुनगन गावन लागे ।।

उदाहरण – 8

अगुण सगुण गुण मंदिर सुंदर,
भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।
काम क्रोध मद गज पंचानन,
बसहु निरंतर जन मन कानन।।

उदाहरण – 9

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
सुरुचि सुबास सरस अनुराग ।।
अमिय मूरिमय चूरन चारू।
समन सकल भव रुज परिवारू ।।

उदाहरण- 10

एहि विधि गर्भसहित सब नारी।
भई ह्रदय हर्षित सुख भारी।।
जा दिन तें हरि गर्भहिं आए।
सकल लोक सुख सम्पति छाए।।

उदाहरण- 11

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीश तिॅहु लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बलधामा।
अंजनी पुत्र पवन सुतनामा॥

उदाहरण- 12

पर हित सरिस धर्म नहिं भाई।
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥
निर्नय सकल पुरान बेद कर।
कहेउँ तात जानहिं कोबिद नर॥

उदाहरण- 13

हरि अनंत हरि कथा अनंता।
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥
रामचंद्र के चरित सुहाए।
कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥

उदाहरण- 14

धीरज धर्म मित्र अरु नारी।
आपद काल परिखिअहिं चारी॥
बृद्ध रोगबस जड़ धनहीना।
अंध बधिर क्रोधी अति दीना॥

उदाहरण- 15

अनुचित उचित काज कछु होई,
समुझि करिय भल कह सब कोई।
सहसा करि पाछे पछिताहीं,
कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।।

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निष्कर्ष :-

चौपाई छंद में तुलसीदास के काव्यांश देखने को मिलते है जिसमे रामायण में और सुन्दरकांड में चौपाई छंद का विस्तृत वर्णन मिलता है तो हमने इसके जितने भी उदाहरण थे उसके बारे में डिटेल में बता दिया है तो इन्हें चेक कर ले.

ऊपर हमने जितने भी उदाहरण दिए है उनके सभी के व्याख्या सहित समझाया है तो इन्हें आप तैयारी करने में उपयोग में ले सकते है इसी प्रकार के अन्य हिंदी व्याकरण से सम्बंधित टॉपिक को पढने के लिए आप हमारे ब्लॉग परिभाषा देखो को बुकमार्क कर लेवे.

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