इस पोस्ट में हमने वात्सल्य रस किसे कहते है, वात्सल्य रस के भेद कितने होते है, Vatsalya Ras का उदाहरण व्याख्या सहित हिंदी में नीचे आपको समझाया है.
वात्सल्य रस की परिभाषा :-
जब किसी काव्य या फिर किसी प्रसंग को सुनने परप्रेम या ममता का भाव उत्पन्न हो उसे वत्सल रस कहते हैं.
वत्सल रस में माता-पिता का संतान के प्रति जो स्नेह और ममता का भाव, अनुज और ज्येष्ठ के प्रति दुलार ये सभी अनुभाव पाए जाते है इसीलिए इसे वात्सल्य रस कहते है.
वत्सल रस में बच्चों की तूतली बोली, उनके घर के आंगन में भारी जाने वाली किलकारियां,अबोध जन्य कार्य, घुटनों के बल चलना, रेंगना, हठ करना और अनेक ऐसे कार्य जो वत्सल रस के भाव में पाए जाते हैं.
वत्सल रस के भेद-
वत्सल रस के दो भेद माने गए हैं-
- संयोग वत्सल रस- इस रस में शिशु का मन के पास रहना खेलना हंसना बोलनाभी भाव पाए जाते हैं
- वियोग वत्सल रस- वियोग वात्सल्य रस में बच्चों का मां-बाप से बिछड़ जाना और वियोग भाव में रहना यह सभी इस रस में पाया जाता है.

वात्सल्य रस के उदाहरण – Vatsalya Ras ka 10 Udaharan
उदाहरण – 1
हरि अपने रंग में कुछ गावत
तनक तनक चरनन सों नाचत
मनहिं मनहिं रिझावत
बाहीं ऊंचाई काजरी धौरी गेयन टेरी बुलावत
माखन तनिक आपने कर ले तनक बदन में नावत
कबहूँ चितै प्रतिबिंब ख़त में लवनी रखे रखावत
दुरी देखत जसुमति यह लीला हरखि आनंद बढ़ावत
व्याख्या :- इस उदाहरण में माता यशोदा भगवान कृष्ण को देखकर स्नेह उत्पन्न हो रहा है जो श्री कृष्ण गाना, नाचना बांहे उठाकर गायों को बुलाना, मुंह में माखन को डालना,अपने प्रतिबिंब को मक्खन लगाना आदि सभी भाव वात्सल्य रस के दिखाई दे रहे हैं अतः इसमें वत्सल रस है.
उदाहरण – 2
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया। ।
व्याख्या :- ऊपर दिए उदाहरण में श्री राम के बाल्य अवस्थाओं के क्रीडा को दर्शाया गया है। जिसमें वह घुटनों के बल कभी चलते हैं तो कभी खड़े होकर चलने का अभ्यास करते हैं। उनके पैरों में बंधी पायल की घुंघरू की आवाज पूरे राजमहल में गूंज रही है।
उदाहरण – 3
यशोदा हरि पालने झुलावे
हलरावै दुलरावै मल्हावै जोई सोई कछु गावै
मेरे लाल को आऊ निदारिया काहे ना आन सुलावै
तू काहे न बेगि सौ आवे तोको कान्ह बुलावै
कबहूँ पलक हरी मूँद लेत है कबहू अधर फारकावे
सोवत जानी मौन हुवे रहि रहि करि सैन बतावै
इहि अंतर अकुलाय उठे हरी जसुमति मधुर गावै
जो सुख सूर अमर मुनि दुर्लभ सो नन्द भाविनी पावै
व्याख्या :- इस उदाहरण में मां यशोदा श्री कृष्ण को सुलाते हुए उनके पलकों को मूंदना, अधर का फड़फड़ाना, उन्हें झुलना हलराना, गीत गाना, संकेतों से बातें करना आदि सभी भाव इस रस में है इसलिए यह उदाहरण भी वात्सल्य रस का है.
उदाहरण – 4
किलक अरे मैं नेक निहारु
इन दांतों पर मोती वारू
पानी भर आया फूलों के मुंह में आज सवेरे
हां गोपा का दूध जमा है राहुल मुख में तेरे
लटपट चरण चाल अटपट सी मन मायी है मेरे
तू मेरी अंगुली धर, अथवा में तेरा कर धारु
व्याख्या :- इस उदाहरण में राहुल के सुंदर दांत, लटपट चरण अटपटी चाल, दांतों पर मोती वारने की इच्छा, राहुल को हाथ पकड़ने के लिए कहना सभी भाव वात्सल्य रस के हैं अतः इसमें वात्सल्य रस है.
उदाहरण – 5
संदेशो देवकी सों कहियो
हौ तो धाय और तातो जल देखत ही भज जाते
जोई जोई मांगत सोई सोई देती करम, करम करी नहाते
तुम तो रेव जानति ही हवे सब हो, तौमोही कही आवै
परत उठत मेरे लाल लडैतही माखन रोटी भावे
व्याख्या :- उदाहरण में माता यशोदा श्री कृष्ण को गर्म जल से नहलाना, उबटन तेल आदि को देखकर श्री कृष्ण का भाग जाना, भिन्न-भिन्न वस्तुओं की मांग करना, माखन रोटी खाने की आदत को याद करना सभी भाव वात्सल्य रस के हैं.
उदाहरण – 6
किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत।
मनिमय कनक नंद कै आँगन, बिंब पकरिबैं धावत।।
कबहुँ निरखि हरि आपु छाहँ कौं, कर सौं पकरन चाहत।
किलकि हँसत राजत द्वै दतियाँ, पुनि-पुनि तिहिं अवगाहत।।
उदाहरण – 7
बाल दसा सुख निरखि जसोदा, पुनि – पुनि नन्द बुलावति |
अँचरा – तर लै ढांकि सुर, प्रभु कौ दूध पियावति ||
उदाहरण – 8
सुभग सेज सोभित कौसल्या, रुचिर ताप सिसु गोद लिए।
बार-बार विधुवदनि विलोकति, लोचन चारु चकोर किए।
कबहुँ पौढ़ि पय पान करावति, कबहूँ राखति लाइ हिये।
बाल केलि हलरावति, पुलकति प्रेम-पियूष पिये।
उदाहरण – 9
मैया मैं नहिं माखन खायो।
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि मेरे मुख लपटायो।
मैं बालक बहियन को छोटो छीको केहि विधि पायो।
उदाहरण – 10
दादा ने चंदा दिखलाया
नेत्र नीरयुत दमक उठे
धुली हुई मुसकान देखकर
सबके चेहरे चमक उठे।
उदाहरण – 11
यशोदा हरि पालने झुलावै।
हलरावै दुलरावै जोइ-सोई कुछ गावै॥
जसुमति मन अभिलाष करे
कब मेरो लाल घुटुरुवन रेगे,
कब धरनि पग दै धरै॥
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूल-धुसर तुम्हारे ये गात।
उदाहरण – 12
हरि अपने रँग में कछु गावत ।
तनक- तनक चरनन सों नाचत, मनहिं मनहिं रिझावत ॥
बाँगि उँचाइ काजरी-धौरी गैयन टेरि बुलावत ।
माखन तकन आपने कर ले तनक बदन में नावत ॥
कबहुँ चितै प्रतिबिंब खंभ में लवनी
उदाहरण – 13
वर दन्त की पंगति कुन्दकली अधराधर पल्लव खोलन की।
चपला चमकै घन बीच जगै छवि मोतिन माल अमोलन की॥
घुँघरारि लटैं अटकै मुख ऊपर कुण्डल लोल कपालन की।
निवछावर प्राण करें तुलसी बलि जाऊँ लला इन बेलन की ॥
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निष्कर्ष :-
इस रस में हमने Vatsalya Ras से संबंधित जितने भी भाव-भाव होते हैं उनके बारे में आपके ऊपर समझा दिया है जिसमें बच्चों के प्रति स्नेह भाव दिखाई देता है जिसमें भगवान कृष्ण और यशोदा के बहुत से वृत्तांत को हमने उदाहरण के रूप में समझाया है जिन्हें आप ऊपर चेक कर सकते हैं.
इन सब के उदाहरण को हमने रिसर्च करके आपको समझाया है तो अपनी तैयारी में उपयोग करें बिना संकोच किए हुए यदि पोस्ट अच्छी लगी हो तो उसे अपने दोस्तों के लिए शेयर करें और इसी प्रकार के हिंदी व्याकरण से संबंधित अन्य टॉपिक को पढ़ने के लिए परिभाषा देखो की बुकमार्क कर ले.