इस पोस्ट से आप Shringar Ras के बारे में विस्तार से समझाने वाले है जिसमे हम आपको Shringar Ras Ki Paribhasha, श्रृंगार रस के उदाहरण व्औयाख्रया सहित और श्रृंगार रस के प्रकार के अलावा इसके नियम के बारे में बताने वाले है.
श्रृंगार रस किसे कहते है :- Shringar Ras Ki Paribhasha
श्रृंगार शब्द दो शब्दों से मिलकर बना होता है- जो की श्रंग + आर
जहां पर श्रृंगार का अर्थ काम भाव और आर का अर्थ वृद्धि गति या प्राप्ति होता है इसका मतलब काम भावना के प्रति या काम की प्राप्ति अनुभाव होना शृंगार कहलाता है.
श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति होता है यहां रति स्त्री और पुरुष के पारस्परिक प्रेम से संबंधित होता है प्राचीन समय में स्त्री और पुरुष के शुद्ध प्रेम को रति कहा गया है.
दूसरे अर्थ में श्रृंगार रस में जहां पर नायक हुआ नायक के प्रेम की क्रियाकलापों का वर्णन हो वहां श्रृंगार रस पाया जाता है श्रृंगार रस को रसराज या रसों का राजा कहा जाता है.
श्रृंगार रस के अवयव (चार अंग)
- स्थायी भाव — रति (प्रेम या आकर्षण), जो पूरे रस की बुनियाद है।
- आलंबन विभाव — वह पात्र जिसके प्रति भाव जगे, यानी नायक या नायिका।
- उद्दीपन विभाव — वह परिवेश जो भाव को और गहरा करे, जैसे चाँदनी रात, बाग़, हाव-भाव, तिरछी चितवन।
- अनुभाव — भाव की बाहरी अभिव्यक्ति, जैसे कटाक्ष, मुस्कान, आलिंगन।
- संचारी भाव — क्षणिक भाव जो आते-जाते रहते हैं, जैसे लज्जा, हर्ष, चपलता।
श्रृंगार रस के भेद-
श्रृंगार रस के दो भेद होते हैं
1.- संयोग श्रृंगार –
जहाँ नायक और नायिका के मिलन, स्पर्श, संवाद या साथ बिताए पलों का वर्णन हो, वहाँ संयोग श्रृंगार रस होता है। मिलन का सुख, एक-दूसरे को निहारना, बातचीत का आनंद ये सब संकेत इस रस में देखने को मिलते है.
जैसे :- बिहारी का प्रसिद्ध दोहा :-
- बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
- सौंह करे भौंहनु हँसे, दैन कहे नटि जाय॥
व्याख्या:- यहाँ कृष्ण राधा और सखियों के साथ बातचीत का आनंद लेने के लालच में मुरली छिपा देते हैं और लौटाने का वादा करके भी टाल जाते हैं। स्थायी भाव रति है आलंबन कृष्ण और सखियाँ हैं और अनुभाव के रूप में मुस्कान व टालमटोल का वर्णन है तो इसमें संयोग श्रृंगार के भाव है.
2.-वियोग श्रृंगार :-
जहाँ नायक-नायिका के बिछड़ने, विरह और दूरी की पीड़ा का चित्रण हो, वहाँ वियोग या विप्रलंभ श्रृंगार रस होता है। यहाँस्थायी भाव तो रति ही रहता है पर मिलन की जगह जुदाई का दर्द देखने को मिलता है.
जैसे :-
बिहारी का यह दोहा वियोग श्रृंगार :-
- औंधाई सीसी सुलखि, बिरह विथा विलसात।
- बीचहिं सूखि गुलाब गो, छींटो छुयो न गात॥
व्याख्या:- नायिका विरह की आग में इतनी झुलस रही है कि उसे शीतलता देने के लिए छिड़का गया गुलाब जल शरीर तक पहुँचने से पहले ही सूख जाता है।

श्रृंगार रस के उदाहरण- Shringar Ras Ke 10 Udaharan
उदाहरण 1-
- देख रूप लोचन लालयाने | हर से जानू निज निधि पहचाने|
- थकेनयनरघुपति छवि देखें | पलकहिहू परिहारी निमेषे ||
- अधिक सनेह देह भर भोरी सरद ससहिं जणू चितव चकोरी
- लोचन मृग रामही उर आनी दीन्हे पलक कपाट समानी
व्याख्या:- इस उदाहरण में यहां पर सीता आश्रय है राम आलंबन विभाव है देखना अनुभाव है और देह भर भारी साधिक है.
उदाहरण- 2
- कंहू बाग़ तड़ाग तरंगिनी तीरतमाल की छांह विलोकी भली
- घटिया याक बेठत है सुखपाय विधायतहाँ कुस कास थली
- मग को श्रम दूर करे सिय को शुभ बल्कल अंचल सों
- भ्रम टू हरे तिन को कहीं केशव चंचल चारु दृगअंचल कौ
व्याख्या:- इस उदाहरण में नायक और नायिका एक दूसरे के भाव में आलंबन में रहते हैं जिसमें नायक का स्थाई भाव आलंबन है और नायिका उस भाव के आश्रय होती है.
उदाहरण-3
- देखन मिस मृग विहंग तरु
- फिरती बोहरी बोहरी
- निरख निरखी रघुवीर छवि
- बाढी प्रीति न थोरी
व्याख्या:- इस उदाहरण में श्री राम को देखकर सीता के प्रेम का वर्णन किया गया हैजिसमें आश्रय सीताजी हैं और आलंबन श्री राम जी और देखना अनुभाव होता है.
उदाहरण -4
- कंकन किंकिन नूपुर ध्वनि सुनि
- कहते लषत सन राम हृदय गुनी
- मानहु मदन दुन्दुभी दीन्ही
- मनसां विश्व विजय कह कीन्ही
- अस कही फिरि चितये तेहि ओरा
- सीय मुख ससि भये नयन चकोरा
- भये विलोचन चारु अचंचल
- मनहु संकुचि निमी ताज दृगअंचल
व्याख्या:- इस उदाहरण में राम और सीता के प्रति भाव को दिखाया गया हैजिसमें सीता के मुख्य को शशि के समान और आंखों को चकोर के समान बताया गया है.
उदाहरण 5-
- भूषण बसन विलोकत सिये के
- प्रेम बिवस मन कंप पुलक तन
- नीरज नैन नीर भर पिय के
- सकुचत कहत सुमिरि उर उगमत,
- सील सनेह सगुन गन तिय के
व्याख्या:- इस उदाहरण में भगवान राम और सीता की वियोग अवस्था का वर्णन किया गया है जिसमें राम आश्रय हैं सीता आलंबन विभाग और अश्रु सात्विक अनुभाव है.
उदाहरण- 6
- हाँ गुनखानी जानकी सीता म रूप सील व्रत नेम पुनीता
- लछिमन समझाये बहु भांति, पूछत चलेलता तरु पांति
- हे खग मृग हे मधुकर सरेनी, तुम्ह देखि सीता मृग नायिनी
- किमी सही जात अनख तोहिं पाहि, प्रिय वेगी प्रगटसी कास नाही ||
व्याख्या:- इस उदाहरण में सीता की वियोग व्यथा में भगवान राम उनके वियोग के प्रतिभाव और अनुभाव प्रकट कर रहे हैं और पक्षियों और हिरणों से वह पूछ रहे हैं कि आपने मृगनयनी सीता को कहीं देखा है क्या और अपना प्रेम प्रकट कर रहे हैं.
उदाहरण- 7
- मनहु गोपाल आयो मेरे घर हंसकर भुजा गहि
- कहा कंहूँ बेरिं भई निदिया निमिष न और रही
उदाहरण- 8
- तैसे करी सति सौन्हानी मनाय ल्याई
- पे इक हमारी बात एती बिसरिये जनि
- आजू की घरी तेन ले सुभुतिन्हू भले हों श्याम
- ललिता को लैके नाम बांसुरी बजैये जनि
उदाहरण- 9
- निसि दिन बरसत नैन हमारे
- सदा सेहत पावस ऋतू हमपे जबते श्याम सिधारे
- कंचुकी पट सूखत नहीं सजनी उर बिच बेहत पनारे||
उदाहरण- 10
- पर कागज देह को धारे फिरो परजन्य जतारथ है बरसो
- निधि नीर सुधा के समान करो सब ही विधि सज्जनता परसों |
- घन आनंदजीवनदायक होकछु मेरापीर हृदय परसों
- कबहू वा विशासी सूजान के आंगन मो अंशुवान को ले वरसो |
उदाहरण- 11
- श्याम सुरती करे राधिका तकती तरुणनिजा तीरू
- अंशुवन करति तरोंस को खिनुक करो हौं नीरू
उदाहरण- 12
- तन संकोच मन परम उछाऊ
- गुड प्रेम लखी प्रेम पारीअ ना काहू
- जाई समीप राम छवि देखि
- रही जनू कुंवारी चित्र अभिरेखी
उदाहरण- 13
- प्रिया वियोग का यह सूनापन
- स्मृतियों से भर भर जाता मन
- पूर्ण समर्पण का पागलपन
उदाहरण- 14
- बैठी मोहन शकुंतला सहज थी सौंदर्य सोहती
- मनो होकर चित्त में का खचित सीथी चित्त को मोहती ||
उदाहरण- 15
- सुमिरु मोहने सन्देश रूप सुमिरून है आयो
- पुलिकित आनन् कमल अंग आवेश जनायो
- विह्वल धरनी परीं ब्रज वनिता मुरझाय
- दे जल छींट प्रबोध हीं ऊधो बैन सुनाय
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निष्कर्ष :-
इस पोस्ट में हमने आपको श्रृंगार रस की बारे में डिटेल में समझाया है इसमें आपको बताया है कि श्रृंगार रस किसे कहते हैं इसके कितने भेद होते हैं इसके अलावा श्रृंगार रस के सभी उदाहरणों को हमने आपको व्याख्या सहित समझाए है और आशा करते हैं आप यह रस के बारे में आप समझ चुके होंगे.
इस रस की जितनी भी डिटेल हैं वह हमने रिसर्च करके आपको समझाइए हैं तो आप निश्चिंत होकर इसे अपनी परीक्षा में तैयारी के लिए उपयोग में ले सकते हैं यदि इसी प्रकार की हिंदी व्याकरण से संबंधित टॉपिक के बारे में जानकारी चाहते हैं तो आप हमारे ब्लॉग परिभाषा देखो को बुकमार्क कर ले.