Kundaliya Chhand : कुंडलिया छंद के उदाहरण और परिभाषा

इस पोस्ट में हम आपको Kundaliya Chhand Kise Kehte Hai, कुंडलिया छंद के उदाहरण, कुंडलिया छंद की परिभाषा, नियम, विशेषताएँ और सरल उदाहरण सहित बताने वाले है.

इस पोस्ट में कुल कुंडलिया छंद के 15 उदाहरण दिए गये जिसमे ऊपर के 3-4 छंद को हमने व्याख्या सहित समझाया है जिससे आप कुण्डलिया छंद के बारे में अच्छे से समझ जाओगे.

कुंडलिया छंद किसे कहते हैं-

कुंडलिया छंद एक मिश्रित छंद है जो की दोहा और रोला छंद के मिलने से बना है कुंडलिया छंद के पहले दो चरण दोहा तथा शेष चार चरण रोला छंद से बने होते है। इस छंद के 6 चरण होते हैं तथा प्रत्येक चरण में 24 मात्राएँ होती है उसे कुंडलिया छंद कहते हैं.

अर्थात इस छंद की प्रत्येक पंक्ति के पहले चरण में 13 मात्राएं और द्वितीय चरण में 11 मात्राएं होती हैं इसलिए कुल 24 मात्राएं होती हैं.

दोहा एक अर्धसम मात्रिक छंद है हर चरण में 24 मात्राएँ होती हैं, जिसमे पहले भाग में 13 मात्रा और दूसरे भाग में 11 मात्रा और इन दोनों के बीच में यति होता है।

रोला भी एक मात्रिक छंद है प्रत्येक चरण में कुल 24 मात्राएँ होती हैं जिसमे पहले भाग में 11 मात्रा और दूसरे भाग में 13 मात्रा और दोनों के बीच में यति आती है।

यानी दोहा और रोला दोनों में मात्रा तो बराबर (24) है, बस पहले और दुसरे का क्रम बदल जाता है।

कुंडलिया छंद की विशेषताएँ :-

  • यह एक मिश्रित छंद है जो दो छंदों (दोहा और रोला) को जोड़कर बनाया जाता है.
  • इसमें कुल 6 चरण होते हैं, हर चरण में 24 मात्रा होती है.
  • इसकी रचना बाकी अन्य सरल छंदों की तुलना में थोड़ा कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें एक साथ कई नियम जोड़े जाते है.

Kundaliya Chhand

कुंडलिया छंद के उदाहरण-

उदाहरण- 1

  • बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेय
  • S S  S |   | S |  S,   SS S   | |   S | =  13+11 = 24 मात्राएँ
  • जो बनि आवे सहज में, ताही में चित देय
  • S  | |   S S  | | |   S,  S S S | |  S |  = 13+11 = 24 मात्राएँ
  • ताही में चित देय, बात जो ही बनि आवे
  • S S  S  | |  S |,  S | S  S  | |   S S = 11+ 13 = 24 मात्राएँ
  • दुरजन हँसे न कोय, चित्त में खेद न पावे
  • | | | | | S |  S  |,  S |  S S | |  S S =   11+ 13 = 24 मात्राएँ
  • कह गिरधर कविराय, यहै कर मन पर तीती
  • आगे की सुधि लेय, समुझी बीती सो बीती

व्याख्या सहित :- ऊपर दिए गए उदाहरण में पहले चरण में 13 मात्राएं और फिर 11 मात्राएं हैं इसी प्रकार से दूसरे चरण में भी हैं फिरतीसरी पंक्ति के प्रथम चरण में 11 मात्राएं और दूसरे चरण में 13 मात्राएं हैं अतः यह है कुंडलिया छंद का उदाहरण है. 

जो की प्रथम दो पंक्तियां दोहा छंद की और अंतिम चार पंक्तियां रोला छंद की है अतः हम कह सकते हैं एक कुंडलिया छंद एक मिश्रित चांद है

उदाहरण- 2

बिन बिचारे जो करे सो पीछे पछताए|

काम बिगारे आपनो, जग में होत हंसाय

जग में होत हंसाय, चित्त में चैन ना पावे

खान पान सम्मान,  राग रंग मनहि ना भावे

कहीं गिरधर कविराय, दुख कछु टरत ना टारै

खटकत है जिय मांहि, कियो जो बिना विचारे

उदाहरण- 3

  • ऽ ऽ ऽ ऽ   I I  I ऽ,    ऽ I I  ऽ  ऽ  ऽ I         =  24 मात्राएं
    कोई संगी उत नहीं,  है इत ही को संग।
  • । ऽ  ऽ ।  । ।    ऽ ।  ऽ । । ऽ । । ।  । ऽ । =     24 मात्राएं
    पथी लेहु मिलि ताहि ते सबसों सहित उमंग।।
  • । । ऽ  । । ।  । ऽ ।  ऽ ।  ।। ऽ ऽ  ऽ ऽ    =    24 मात्राएं
    सबसों सहित उमंग बैठि तरनी के माहीं।

व्याख्या सहित :- ऊपर दिए गए उदाहरण में पहले चरण में 13 मात्राएं और फिर 11 मात्राएं हैं इसी प्रकार से दूसरे चरण में भी हैं फिरतीसरी पंक्ति के प्रथम चरण में 11 मात्राएं और दूसरे चरण में 13 मात्राएं हैं अतः यह है कुंडलिया छंद का उदाहरण है. 

उदाहरण- 4

तुक बंदी का बढ़ रहा, कविता में अति जोर

लगे नाचने मुर्ग भी, समझि ही स्वयं को मोर

समझि ही स्वयं को मोर, अर्थ तक नहीं जानते

पढ औरों के गीत, काव्य का रस बखानते

कहे कपिल समझाय, चल रही है दलबंदी

कविता रोती आज, हंस रही है तुकबंदी

उदाहरण- 5

नारि सुहागिन कर रही,पूजा जप तप ध्यान।

पति की लम्बी आयु हो, खूब बढ़े जग मान।

खूब बढ़े जग मान, करे उपवास तुम्हारा।

मात चौथ सुन अर्ज , रहे संजोग हमारा।

कर सोलह सिंगार, निभाये प्रीत यहाँ दिन।

पति हित सारे काज, करे ये नारि सुहागिन।

उदाहरण- 6

जगती की शोभा सदा, जीवन पानी पेड़।

प्राणवायु मिलती सखे, वृक्ष रोपि पथ मेड़।

वृक्ष रोपि पथ मेड़,जगह जो भी मिल जावे।

श्यामा पर ये पेड़, मेह घन श्याम बुलावे।

कहे ‘लाल’ कविराय,धरा मनभावन लगती।

पर्यावरण सुधार, बने स्वर्गिक जग जगती।

उदाहरण- 7

हरे-भरे हों पेड़ सब, छाया दें घनघोर।
उपवन में हँसते सुमन, सबको करें विभोर।।
सबको करें विभोर, प्रदूषण हर लेते हैं।
कंकड़-पत्थर खाकर, मीठे फल देते हैं।।
कह ‘मयंक’ आचरण, विचार साफ-सुथरे हों।
उपवन के सारे, पादप नित हरे-भरे हों।।

उदाहरण- 8

सावन बरसा जोर से, प्रमुदित हुआ किसान ।

लगा रोपने खेत में, आशाओं के धान ।।

आशाओं के धान, मधुर स्वर कोयल बोले ।

लिए प्रेम-सन्देश, मेघ सावन के डोले ।

‘ठकुरेला’ कविराय, लगा सबको मनभावन ।

मन में भरे उमंग, झूमता गाता सावन ।।

उदाहरण- 9

चौथ व्रती बन पूजती, चंदा चौथ चकोर।

आज सुहागिन सब करें,यह उपवास कठोर।

यह उपवास कठोर , पूजती चंदा प्यारा।

पिया जिए सौ साल, अमर संयोग हमारा।

कहे लाल कविराय, वारती जती सती बन।

अमर रहे तू चाँद, पूजती चौथ व्रती बन।

उदाहरण- 10

बेटे-बेटी में करो, समता का व्यवहार।
बेटी ही संसार की, होती सिरजनहार।।
होती सिरजनहार, स्रजन को सदा सँवारा।
जिसने ममता को उर में जीवन भर धारा।।
कह ‘मयंक’ दामन में कँटक रही समेटे।
बेटी माता बनकर जनती बेटी-बेटे।।

उदाहरण- 11

दौलत पाय न कीजिए, सपने में अभिमान ।
चंचल जल दिन चारि कौ, ठाउँ न रहत निदान ।।
ठाउँ न रहत निदान, जियन जग में जस लीजै ।
मीठे बचन सुनाय, विनय सबही की कीजै ।।
कह गिरिधर कविराय, अरे यह सब घर तौलत ।
पाहुन निसिदिन चारि, रहत सब ही के दौलत ।

उदाहरण- 12

चढ़ती चींटी सर्वदा, अनथक करे प्रयास ।

ले जाती है शीर्ष तक, बस मंजिल की आस ।।

बस मंजिल की आस, सदा श्रम करती जाती ।

हो जाता श्रम साध्य, और मंजिल को पाती ।

कहे ‘साधना’ सत्य, लगन ही आगे बढ़ती ।

देती श्रम की सीख, तुच्छ चींटी जब चढ़ती ।।  

उदाहरण– 13

रत्नाकर सबके लिए, होता एक समान।
बुद्धिमान मोती चुने, सीप चुने नादान ।।
सीप चुने नादान, अज्ञ मूंगे पर मरता ।
जिसकी जैसी चाह, इकट्ठा वैसा करता।
‘ठकुरेला’ कविराय, सभी खुश इच्छित पाकर ।
“हैं मनुष्य के भेद, एक सा है रत्नाकर।।

उदाहरण- 14

थोथी बातों से कभी, जीते गये न युद्ध ।

कथनी पर कम ध्यान दे, करनी करते बुद्ध ।।

करनी करते बुद्ध, नया इतिहास रचाते ।

करते नित नव खोज, अमर जग में हो जाते ।

‘ठकुरेला’ कविराय, सिखातीं सारी पोथी ।

ज्यों ऊसर में बीज, वृथा हैं बातें थोथी ।। 

उदाहरण- 15

चलती रहती जिंदगी, ज्यों कागज़ की नाव ।

लोग भटकते लक्ष्य से, करते नहीं चुनाव ।।

करते नहीं चुनाव, हवा खे कर ले जाती ।

कुछ हो जाती पार, कहीं पर भँवर डुबाती ।

कहे ‘साधना’ सत्य, करो मत कोई गलती ।

हाथ रखो पतवार, नाव तब ढंग से चलती ।। 

यह भी पढ़े :-

 सोरठा छंददोहा छंद
 रोला छंद मुक्तक छंद
 हरिगीतिका छंदकुण्डलिया छंद
सवैया छंदचौपाई छंद

निष्कर्ष:-

कुंडलिया छंद को समझने के लिए दोहा और रोला छंद को भी अलग-अलग जानना होगा फिर उन्हें नियम को समझके फिर कुण्डलिया छंद को समझ जाओगे.

पहला आपको हमने जितने उदाहरण बनते है वो सभी हमने आपको ऊपर दे रखे है तो आप उनकी व्याख्या को पढके समझ ले की किस प्रकार से यह छंद बनता है तो आप इसे पढ़े.

Kundaliya Chhand FAQ:-

कुंडलिया छंद किस प्रकार का छंद है?

यह एक विषम मात्रिक छंद है, जो दोहा और रोला छंदों को जोड़कर बनता है।

कुंडलिया छंद में कुल कितने चरण होते हैं?

इसमें कुल 6 चरण होते हैं पहले 2 दोहे के और अंतिम 4 रोला के चरण होते है.

कुंडलिया छंद किन विषयों पर लिखा जाता है?

कुंडलिया छंद में परंपरागत रूप से यह नीति, उपदेश और सामाजिक व्यंग्य जैसे विषयों के लिए प्रयोग होता है।

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