इस पोस्ट में हम समझाने वाले है की हरिगीतिका छंद किसे कहते है, हरिगीतिका छंद की परिभाषा, Harigitika Chhand Ka Udaharan और इसके नियम को डिटेल में बताने वाले है.
हरिगीतिका छंद की परिभाषा :-
यह है सम मात्रिक छंद है इस छंद की प्रत्येक पंक्ति में 28 मात्राएं होती हैं जिनमे 16 और 12 मात्राओ पर यति होती है प्रत्येक पंक्ति के अंत में लघु और गुरु अवश्य होता है.
गीतिका छंद आरंभ में दो मात्रा जोड़ने से हरिगीतिका छंद बनता है क्योकि गीतिका छंद में 26 मात्राए होती है.

हरिगीतिका छंद के उदाहरण- Harigitika Chhand Ke 10 Udaharan
उदाहरण- 1
- संसार की समरस्थली में, धीरता को धारण करो
- S S | S | | | S S, S | S S S | | | S = 28 मात्राएं
- चलते हुए निज इष्ट पथ पर, संकटों से मत डरो
- | | S | S | | | s | | | |, S | S S | | | S = 28 मात्राएं
- जीते हुए मृतक सम रहकर न केवल दिन भरो
- वर वीर बन कर आप अपनी, विध्न बाधाएं हरो
व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में प्रत्येक पंक्ति में 28 मात्राएं हैं जिसमे 16 मात्राओ और 12 मात्राओं पर यति है अतः इस उदाहरण में हरिगीतका छंद है.
उदाहरण-2
- लघु लागि विधि की निपुणता, अवलोकी पुर सोभा सही
- | | S | | | S | | | S, | | S S | | S S | S = 28 मात्राएं
- वन बाघ कूप तडाग सरिता, सुभग सब सक को कही
- | | S | S | | S | | | S, | | | | | | | S | S = 28 मात्राएं
- मंगल विपुल तोरण पताका, केतु गृह गृह सोहहीं
- वनिता पुरुष सुन्दर चतुर छवि, देखि मुनि मन मोहही
व्याख्या :- ऊपर दिए गए उदाहरण में प्रत्येक पंक्ति में 28 मात्राएं हैं जिसमे 16 मात्राओ और 12 मात्राओं पर यति है अतः इस उदाहरण में हरिगीतका छंद है.
उदाहरण-3
प्रभु गोद जिसकी वह यशोमति, दे रहे हरि मान हैं ।
गोपाल बैठे आधुनिक रथ, पर सहित सम्मान हैं ॥
मुरली अधर धर श्याम सुन्दर, जब लगाते तान हैं ।
सुनकर मधुर धुन भावना में, बह रहे रसखान हैं॥
उदाहरण- 4
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन, हरण भव भय दारुणम् ।
नवकंज लोचन कंज मुख कर, कंज पद कन्जारुणम ॥
कंदर्प अगणित अमित छवि नव, नील नीरज सुन्दरम ।
पट्पीत मानहु तडित रुचि शुचि, नौमि जनक सुतावरम ॥
उदाहरण- 5
कोई ना मेरे राज्य में भूखा तथा नंगा रहे
सुख का हिमालय हो खड़ा, सुख चैन की गंगा बहे
उदाहरण- 6
मम मातृभूमिः भारतं धनधान्यपूर्णं स्यात् सदा ।
नग्नो न क्षुधितो कोऽपि स्यादिह वर्धतां सुख-सन्ततिः ।
स्युर्ज्ञानिनो गुणशालिनो ह्युपकार-निरता मानवः,
अपकारकर्ता कोऽपि न स्याद् दुष्टवृत्तिर्दांवः ॥
उदाहरण- 7
है तात, है मातुल, जन्हाँ हो, है प्रणाम तुम्हे वहीँ |
अभिमन्यु का इस भांति मरना, भूल मत जाना कहीं | |
उदाहरण- 8
श्री कृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूलकर, करतल युगल मलने लगे।
संसार देखे अब हमारे, शत्रु रण मे म्रत पड़े।
करते हुए यह घोषणा वे, हो गये उठकर खड़े।।
उदाहरण- 9
मेरे इस जीवन की है तू, सरस साधना कविता।
मेरे तरु की तू कुसुमित , प्रिय कल्पना लतिका।
मधुमय मेरे जीवन की प्रिय,है तू कल कामिनी।
मेरे कुंज कुटीर द्वार की, कोमल चरण-गामिनी।
उदाहरण- 10
बढ़ते चलो सब वीर पावन , आज सिर पर ताज है।
करते रहो तुम वीर प्रेरित, यह सुखी अहिवात है ।
रखना सदा अगला कदम तुम, सरहदों पर जान है ।
इस देश के अब प्राण हैं हम, मात का अभिमान हैं ।
मिल के सदा रहना यहाँ पर, राष्ट्र की यह शान है।
मत भूलना प्रिय गीत को तुम, प्रेम ही पहचान है।
हर जंग को अब जीत लो तुम, भारती जन मान है ।
धरती कहे यह ओढ़नी प्रिय, प्रेम की सुख खान है
यह भी पढ़े :-
निष्कर्ष :-
इस पोस्ट में हमने हरिगीतिका छंद के लगभग सभी महत्वपूर्ण उदाहरण को शामिल कर लिया है और इन सभी उदाहरण व्याख्या भी आपको नीचे समझा दी है नीचे अंत तक जरूर पढ़ें.
इसी प्रकार के अन्य हिंदी व्याकरण से संबंधित टॉपिक पढ़ने के लिए आप हमारे ब्लॉक परिभाषा देखो को बुकमार्क कर सकते हैं.
इस पोस्ट में हमने हरिगीतिका छंद की परिभाषा और उदाहरण व्याख्या सहित समझा दिया है इसे आप निश्चित होकर अपनी तैयारी में उपयोग ले सकते हैं.
अन्य किसी शिकायत है सुझाव हो तो जानकारी के लिए आप हमें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं हम निश्चित ही उसका समाधान करके आपको बताएंगे.