Shiksha Manovigyan Ki Paribhasha, शिक्षा मनोविज्ञान क्या है.

आज हम जानेंगे की Shiksha Manovigyan Ki Paribhasha, शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा, शिक्षा मनोविज्ञान क्या है, शिक्षा मनोविज्ञान की विशेषताएं, शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ के बारे में आपको बताने वाले है.

शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ-

शिक्षा मनोविज्ञान दो शब्दों से मिलकर बना है – शिक्षा + मनोविज्ञान जिसमें शिक्षा का अर्थ व्यवहार का परिमार्जन/उन्नतशील तथा मनोविज्ञान का अर्थ व्यवहार का अध्ययन करना होता है।

शिक्षाब्द की उत्पत्ति संस्कृत की ‘ शिक्षा ‘ धातु से हुई है जिसका अर्थ है – ‘ प्रकाशित करना ‘ ।
भारतीय साहित्य में शिक्षा के लिए ‘ विद्या ‘ शब्द का प्रयोग भी हुआ है । ‘ विद्या ‘ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के विद् धातु से हुई है ।

मनोविज्ञान’ शब्द को अंग्रेजी में साइकोलॉजी कहते हैं। यह शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है–‘साइके’ तथा लोगास।
साइके का अर्थ है-“आत्मा’ तथा लोगास का अर्थ है-‘विज्ञान’। इस प्रकार ‘साइकोलॉजी’ का अर्थ हुआ ‘आत्मा का विज्ञान’ या’ आत्मा का अध्ययन’।

शिक्षा सम्बन्धी ऐसे कई तथ्य हैं जिनका सामान्य मनोविज्ञान से कोई सम्बन्ध नहीं है, जैसे – पाठ्य विषयों का अध्यापन, प्रशिक्षण सम्बन्धी कठिनाइयों का निदान तथा निराकरण, शिक्षण उपलब्धियों का मापन, प्रौढ़ शिक्षा, शैक्षिक निर्देशन आदि विशेष समस्याओं का निराकरण शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा होता है ।

Shiksha Manovigyan Ki Paribhasha-

अब हम जानेंगे की शिक्षा मनोविज्ञान किसे कहते है, शिक्षा मनोविज्ञान की विशेषताएं, शिक्षा मनोविज्ञान के उद्देश्य और अन्य विद्वानों द्वारा इसकी परिभाषा के बारे में आपको बताने वाले है.

शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान का व्यावहारिक रूप है तथा शिक्षा की प्रक्रिया में मानव व्यवहार का अध्ययन करने वाला विज्ञान है और इसके साथ शैक्षिक क्षेत्र में आने वाले बाधाओ का समाधान करती है उसे शिक्षा मनोविज्ञान कहते है.

Shiksha Manovigyan Ki Paribhasha

शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा विद्वानों द्वारा-

स्वामी विवेकानंद के अनुसार :- मनुष्य में अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यिक्ति ही शिक्षा है ।

नॉल तथा अन्य के द्वारा” शिक्षा मनोविज्ञान मुख्य रूप से शिक्षा की सामाजिक प्रक्रिया से परिवर्तित या निर्देशित होने वाले मानव – व्यवहार के अध्ययन से सम्बन्धित है.

महात्मा गाँधी के द्वारा :- शिक्षा से मेरा तात्पर्य बालक या मनुष्य़ के शरीर, मष्तिक तथा आत्मा के सर्वोंत्तम विकास की अभिव्यक्ति है।

Shiksha Manovigyan Ki Paribhasha

डुनेविले ने परिभाषित किया है की :- शिक्षा के व्यापक अर्थ में वे सभी प्रभाव व अनुभव आ जाते है। जो बालक को जन्म से मृत्यु तक प्रभावित करते है।

जान डीवी ने कहा है की :- शिक्षा व्यक्ति की उन सभी योग्यता का विकास है, जिनके द्वारा वह वातावरण के उपर नियंत्रण स्थापित करता है।

ट्रो महोदय के शब्दों में कहा है – “ शैक्षिक परिस्थितियों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन शिक्षा मनोविज्ञान है । “

स्किनर महोदय के अनुसार , “ शिक्षा मनोविज्ञान का सम्बन्ध व्यवहार तथा मानव व्यक्तित्व के अध्ययन से – उसकी वृद्धि , उसके विकास और निर्देशन से है जो शिक्षा की सामाजिक प्रक्रिया के अन्तर्गत होता है ।शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ व परिभाषाएँ

पेस्टोलोजी के द्वारा :- शिक्षा व्यक्ति की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक विरोधहीन तथा प्रगतिशील विकास है ।

स्वारे तथा डेलफोर्ड ने कहा है की, “ शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य सम्बन्ध सीखने से है । यह मनोविज्ञान का वह अंग है , जो शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं की वैज्ञानिक खोज से विशेष रूप से सम्बन्धित है ।

क्रो तथा क्रो महोदय का कथन है- ” शिक्षा – मनोविज्ञान व्यक्ति के जन्म से वृद्धावस्था तक सीखने के अनुभवों का वर्णन तथा व्याख्या करता है ।

शिक्षा मनोविज्ञान का जनक कौन है?

पेस्टोलाजी को शिक्षाम नोविज्ञान में ‘वैज्ञानिकीकरण का जनक’ माना जाता है। फ्राॅयड एवं हरबर्ट ने शिक्षा-मनोविज्ञान के क्षेत्र में उपरोक्त लोगों के प्रयास को और आगे बढ़ाने मे सहायता की।

शिक्षा मनोविज्ञान की विशेषताएं :-

  • शिक्षा मनोविज्ञान एक व्यवहारिक विज्ञान है जिसका प्रयोग व्यक्ति के व्यवहार को समझकर उसके अनुसार शिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • शिक्षा-मनोविज्ञान के अंतर्गत शिक्षक छात्र के व्यवहार और प्रकृति के आधार पर मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के द्वार अधिक बेहतर परिणाम देने का प्रयास करता है जिससे उसका अधिकतम विकास हो सके इसलिए इसे विकास का विज्ञान भी कहा जाता है।
  • शिक्षा-मनोविज्ञान की विभिन्न मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग किया जाता हैं।
  • शिक्षा-मनोविज्ञान एक वस्तुपरक विज्ञान हैं।
  • शिक्षा-मनोविज्ञान में शिक्षक पहले से विद्यमान वैज्ञानिक ज्ञान का प्रयोग और अधिक व्यवहारिक शिक्षण के संपादन के लिए करता है इसलिए यह एक व्यवहारिक या अनुप्रयुक्त विज्ञान भी हैं।
  • शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक होती है। क्योंकि बालक के व्यवहार का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों, नियमों एवं सिद्धांतों के आधार पर शैक्षणिक वातावरण में किया जाता हैं।
  • शिक्षा मनोविज्ञान छात्रों के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाने मे सक्षम है।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत मनोवैज्ञानिक बालक के पूर्ण व्यवहार का अध्ययन करता है, आँकड़े इकट्ठा करता है, खोज करता है तभी किसी निर्णय पर पहुँचता है। अतः शिक्षा-मनोविज्ञान एक प्रकार से प्रकृति विज्ञान हैं।
  • शिक्षा-मनोविज्ञान में सकारात्मक रूप से यह अध्ययन किया जाता हैं कि बालक का व्यवहार कैसा है और कैसा होना चाहिए। इसलिए यह एक सकारात्मक विज्ञान है।
शिक्षा मनोविज्ञान के उद्देश्य

शिक्षा मनोविज्ञान के उद्देश्य-

  • शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करना है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति की अन्तर्निहित शक्तियों का अधिकतम सम्भव, सहज, स्वाभाविक तथा सर्वांगीण विकास करके उसे समाज का एक उपयोगी नागरिक बनाना है।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा छात्रों की योग्यताओं, क्षमताओं तथा सामथ्र्य का ज्ञान प्राप्त करना।
  • छात्रों की रूचियों का ज्ञान प्राप्त करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान में छात्रो के विकास के विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन करना।
  • छात्रों की विकासात्मक विशेषताओं को ज्ञात करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा छात्रों के वंशानुक्रम का ज्ञान प्राप्त करना।
  • छात्रों के वातावरण का अध्ययन करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा सिद्धान्तों व शिक्षण विधियों का अध्ययन करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा छात्रों की अवस्थाओं के अनुरूप उन्हें विकास की ओर अग्रसर करना।
  • मानव विकास के विभिन्न पक्षों का अध्ययन करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा सीखने की प्रक्रिया का अध्ययन करना।
  • व्यक्तिगत भिन्नताओं का अध्ययन करना।
  • शिक्षण सामग्री तथा अधिगम सामग्री का निर्माण करना।
  • शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा छात्रों के विशिष्ट व्यवहारों का अध्ययन करना।

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निकर्ष-

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