Darshan Ki Paribhasha, दर्शन की परिभाषा

आज हम जानेगे की Darshan Ki Paribhasha | दर्शन की परिभाषा क्या है और इसी प्रकार की परिभाषा देखने के लिए आप हमे फॉलो कर ले.

darshan ki paribhasha-

आज हम जानेंगे की Darshan definition in Hindi | Philosophy meaning in Hindi | darshan kya hai | darshan kise kehte hai | Types of philosophy in Hindi के बारे में बताने वाले है.

दर्शन अंग्रेजी भाषा के फिलॉस्फी ( Phylosphy ) शब्द का रूपांतर है। इस शब्द की उत्पत्ति ग्रीक के दो शब्दों ‘फिलोस’ तथा ‘सोफिया’ से हुई है।

‘फिलोस’ का अर्थ है – प्रेम अथवा अनुराग और ‘सोफिया’ का अर्थ है – ज्ञान

दर्शन शब्द संस्कृत की दृश् धातु से बना है- ‘‘दृश्यते यथार्थ तत्वमनेन’’ अर्थात् जिसके द्वारा यथार्थ तत्व की अनुभूति हो वही दर्शन कहलाता है.
प्रकृति, लोग और चीजें और उनके लक्ष्यों और उद्देश्यों के बारे में लगातार सोचा जाता है।

Darshan Ki Paribhasha, दर्शन की परिभाषा

दर्शन की परिभाषा विद्वानों के द्वारा –

रेमॉण्ट ने कहा है की “दर्शन सतत् प्रयास है जो कि विशेष तथ्यों के पीछे छिपे सत्य पर विचार करता है तथा सत्य की खोज करता है

बट्रेंड रसैल ने , “फिलॉसफी भी अन्य अध्ययन विषयों की भांति एक ज्ञान की खोज के प्रति प्रयास है।

जेएस रॉस ने “फिलॉसफी व शिक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं फिलॉसफी सैद्धांतिक पक्ष है और शिक्षा उसका व्यवहारिक पक्ष है।”

सेलर्स ने “फिलॉसफी विषय विज्ञानो का संकलन है। जैसेेेे ज्ञान मीमांसा, तर्कशास्त्र, नीति शास्त्र, सृष्टि शास्त्र, और सौंदर्यशास्त्र तथा साथ ही एक समुचित सर्वेक्षण भी है।

काण्ट ने कहा है की , “दर्शन ज्ञान का विज्ञान तथा आलोचना है।”

जॉन डीवी ने “जब भी हम दर्शन का गंभीरता से चिंतन करेंगे तभी उसके ज्ञान का प्रभाव जीवन पर पड़ेगा।”

हक्सले ने “मनुष्य अपने जीवन दर्शन तथा संसार के विषय में अपने अपने धारणाओं के अनुसार जीवन व्यतीत करते हैं।”

बर्टन्ड रसैल ने “अन्य क्रियाओं के समान दर्शन का मुख्य उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति है।”

आरडब्ल्यू सेलर्स ने “दर्शन उस निरंतर प्रयास को कहते हैं जिसके द्वारा हम अपनी और संसार की प्रकृति के संबंध में क्रमबद्ध ज्ञान द्वारा एक सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं।”

सैलार्स ने “व्यवस्थित प्रतिबिंबो के माध्यम से, व्यक्ति, प्रकृति तथा विश्व को जानने का अनवरत प्रयत्न ही दर्शन है।”

फिक्टे ने कहा है कि “दर्शन ज्ञान का विज्ञान है।”

दर्शन का विषय-क्षेत्र –

1-तत्त्व मीमांसा –

यह सत्य की प्रकृति की खोज है। आत्मा, शरीर, काल और दृश्य संसार के तत्व क्या हैं? इसका उत्तर खोजने का विचार इसमें किया जाता है।

2- ज्ञान मीमांसा –

इसके अन्तर्गत ज्ञान के स्वरूप की विवेचना एवं उसकी वैधता की विवेचना की जाती है।

3-कर्म मीमांसा –

इसके अंतर्गत तात्कालिक एवं अंतिम मान के प्रश्नों पर विचार किया जाता है। क्या सबसे अच्छा है क्या सुंदर है . इसके दायरे में सामाजिक, नैतिक और धार्मिक विषय आते हैं।

दर्शन का उद्देश्य-

1-रहस्यात्मक आश्चर्य की सन्तुष्टि-

  • वैदिक काल में मानव ने प्रकृति की सुन्दर वस्तुओं, घटनाओं एवं क्रियाओं को देखकर आश्चर्य किया कि सूर्य, चन्द्र, तारे, प्रकाण, आंधी, वर्षा, गर्मी और मानव की उत्पत्ति कैसे हुयी?
  • मानव में इसे जानने की इच्छा हुयी। उसने परम सत्ता की कल्पना की।
  • उसने अपने (आत्म) एवं ईश्वर (परम) में अन्तर किया और दोनों के पारस्परिक सम्बंध को खोजने के लिये प्रयत्नशील हुआ।

2-जीवन की आलोचना और व्याख्या करना-

दर्शन का एक लक्ष्य आधुनिक वर्णों में जीवन की आलोचना एवं व्याख्या करना तथा निश्चित धारणाओं को प्राप्त कराना है जिससे जीवन को लाभ हो सके।

3-जीवन के आदर्शों का निर्माण करना-

  • दर्शन जीवन के प्रति उस निर्णय को कहते है जो मानव करता है।
  • प्राचीन काल से आज तक अपने देश में तथा अन्य सभी देशों में दर्शन का लक्ष्यों जीवन के आदर्शों का निर्माण करना रहा है।
  • अत: आदर्श निर्माण दर्शन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होता है।
दर्शन की परिभाषा
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दर्शन की सामाजिक विज्ञान शाखाएँ

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निकर्ष-

  • जैसा की आज हमने आपको Darshan Ki Paribhasha ,दर्शन की परिभाषा जानकारी के बारे में आपको बताया है.
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