आज हम जानेगे की Anushasan Ki Paribhasha, अनुशासन की परिभाषा क्या है, अनुशासन का अर्थ, Anushasan Definition In Hindi, के बारे में बताने वाले है.
अब हम आपको अनुशासन क्या है, अनुसाशन किसे कहते है, अनुशासन के प्रकार, अनुशासन के सिद्धांत के बारे में आपको बताने वाले है.
anushasan ki paribhasha-
अनुशासन की प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों, कानूनों तथा परम्पराओं का अनुपालन करता था और उसके उपदेशों को स्वीकार कर नम्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करता था, वही अनुशासन कहलाता है.
अनुशासन का अर्थ-
अनुशासन शब्द की उत्पत्ति ‘शासन‘ शब्द के साथ अनु उपसर्ग लगाकर अनुशासन शब्द की रचना हुई है शासन शब्द संस्कृत की ‘शस्’ धातु से बना है जिसका अर्थ है नियम अथवा नियंत्रण शाब्दिक दृष्टि के अनुसार इसका अर्थ है
अनुशासन’ शब्द अंग्रेजी भाषा ‘Discipline’ शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। ‘Discipline’ शब्द लेटिन भाषा के ‘Disciplina’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘सीखना या आज्ञापालन’.
अनुशासन की परिभाषा विद्वानों द्वारा-
Education Board के द्वारा – ‘‘अनुशासन वह साधन है, जिसके द्वारा बच्चों की व्यावसायिक, उत्तम आचरण और उत्तम निहित सर्वोत्तम गुणों की आदत को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है’’।
भारतीय विचारधारा के द्वारा– अनुशासन का संबंध अंतर से है अर्थात् वही व्यक्ति अनुशासित माना जाएगा जो जीवन में आत्म नियमन तथा आत्म नियंत्रण का सहारा लेता है
टी. पी. नन के द्वारा– अनुशासन का अर्थ है अपने आवेगो और शक्तियों को उस व्यवस्था के अधीन करना जो अराजकता का अंत करती है एवं जो अकुशलता और अपव्यय के स्थान पर कुशल और मितव्ययिता की स्थापना करती है.
एच. मारटिन के द्वारा – ‘‘अनुशासन का अर्थ है, व्यवहार के कुछ निश्चित नियमों का पालन करना, सीखना। अुशासन का अनिवार्य गुण आज्ञाकारिता है अर्थात् नियमों एवं अधिकारियों के प्रति आज्ञाकारिता होनी चाहिए’’।
माधव सदाशिव गोलवलकर के द्वारा– जब शरीर, मन तथा बुद्धि तीनों का सामंजस्य होता है सबकी शक्तियां एक दूसरे के साथ सुव्यवस्था से काम करने लगती हैं तब उसे अनुशासन कहते हैं.
डी.वी. के द्वारा – जॉन डी.वी. ने नियन्त्रण की क्षमता के रूप में परिभाषित किया।
डब्ल्यू. एम. रायबर्न के द्वारा –
“सच्चा अनुशासन स्वीकारात्मक एवं रचनात्मक होना चाहिये, नकारात्मक या विनाशकारी नहीं इसके द्वारा निर्माण होना चाहिये, तोड़-फोड़ नहीं।
इसकी वाछित आवश्यकताएँ दमन और शक्ति नहीं बल्कि अभिव्यक्ति और विवेकपूर्ण उत्तरदायोकरण हैं। ”संवेगात्मक नियंत्रण का लक्ष्य चरित्र निर्माण है और चरित्र निर्माण रचनात्मक प्रक्रिया है।
डॉ सुबोध अदावल के द्वारा– विनय को साधन और साध्य दोनों ही रूपों में स्वीकार किया जाता है साधन के रूप में विनय द्वारा शिक्षा प्राप्ति का प्रयत्न किया जाता है साध्य के रूप में शिक्षा द्वारा बालक को विनीत बनाना चाहिए.
अनुशासन के प्रकार – anushasan ke prakar
अनुशासन मुख्यतः से तीन प्रकार का माना गया है-
दमनात्मक अनुशासन:-
इस विचारधारा के लोगों का मानना है कि शिक्षक छात्रों के व्यवहार को नियंत्रित करने का सशक्त माध्यम है। इसमें डण्डे या पिटाई के बल पर अनुशासन चलाया जाता है इसके लिए नियन्त्रण रखना आवश्यक है।
प्रभावात्मक अनुशासन:-
यदि छात्रों को अनुशासित रखना है तो पहले शिक्षक को स्वयं को अनुशासित रखना होगा, क्योंकि शिक्षक छात्रों के समक्ष आदर्श रूप में होता है तथा उसका (शिक्षक) का अनुकरण करता है।
मुक्तात्मक अनुशासन:-
इसमें छात्रों को मुक्त छोड़ देना चाहिए तथा उस पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं लगाना चाहिए। उसे स्व–क्रिया द्वारा अनुशासन सीखना चाहिए तथा बालक को अनुशासन की प्रक्रिया में अनुभव के सिद्धान्त पर बल देना चाहिए।
अनुशासन के सिद्धांत-
अनुशासन का दमनात्मक सिद्धांत–
- दमनात्मक अनुशासन समर्थकों का विचार है कि बिना भय के अुशासन स्थापित नहीं हो सकता, इसलिये भय होना अनिवार्य है।
- प्रवृतियों को नियंत्रित करने के लिये शारीरिक दण्ड सर्वोत्तम साधन है।
- पाशविक प्रवृत्तियों को नियंत्रित कर लिया जाये, तो स्वयं ही कार्य में संलग्न हो जाता है।
- उचित व्यवहार की आशंका को समाप्त करने के लिये दमनात्मक अनुशासन को बनाये रखना चाहिये।
प्रभावात्मक अनुशासन सिद्धांत–
- इस सिद्धांत के अनुसार अनुशासन की स्थापना तो दबाव द्वारा और न ही प्रताड़ना द्वारा ही हो सकती है,
- प्रभावात्मक अनुशासन एक आदर्श अनुशासन है।
- इसमें मध्य मधुर सम्बन्ध प्रेम तथा सहानुभूति का वातावरण होता है।
- बल्कि अनुशासन स्थापित करने के लिये व्यक्ति का प्रभाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन होता है।
- योग्य, चरित्रवान और आदर्श व्यक्तित्व वाला होना चाहिये.
मुक्त्यात्मक अनुशासन सिद्धांत-
- इस सिद्धांत के अनुसार कार्य करने तथा अपना विकास करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिये।
- इस सिद्धांत अनुसार शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्तित्व का स्वतन्त्र विकास करना है।
- इस उद्देश्य के लिये मुक्त्यात्मक अनुशासन ही उचित है।
- इस सिद्धांत में किसी भी प्रकार के दबाव, नियन्त्रण अथवा मदन का विरोध किया गया है।
- मुक्त्यात्मक सिद्धांत में इच्छाओं को सर्वाधिक महत्व प्रदान किया जाता है तथा अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने के स्वतन्त्रता दी जाती है।
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FAQ–
अनुशासन की सही परिभाषा क्या है?
अनुशासन के ऐसी प्रक्रिया है जिसके लिए निर्धारित नियमों, कानूनों तथा परम्पराओं का अनुपालन करता था और उसके उपदेशों को स्वीकार कर नम्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करता था, वही अनुशासन कहा जाता था।
अनुशासन के 3 प्रकार कौन से हैं?
दमनात्मक अनुशासन:-
प्रभावात्मक अनुशासन:-
मुक्तात्मक अनुशासन:-
अनुशासन क्या है और इसके प्रकार?
अनुशासन ऐसी प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों, कानूनों तथा परम्पराओं का अनुपालन करता था और उसके उपदेशों को स्वीकार कर नम्रतापूर्वक जीवन व्यतीत करता था, वही अनुशासन कहा जाता था।
इसके प्रकार—-
दमनात्मक अनुशासन:-
प्रभावात्मक अनुशासन:-
मुक्तात्मक अनुशासन:-
निकर्ष-
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